रूह के लिरिक्स | Akashdeep Sengupta की आवाज़ में एक दिल को छू लेने वाला प्रेम और विरह का गीत। T-Series का ये गाना हर उस दिल की बयां करता है जिसने जुदाई का दर्द महसूस किया हो।
ROOH Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (रूह)
तेरी ही बातें, यादें
बहकाती हैं रातों में अब मुझे
ये साँसें, साँसें,
आए ना देखा बिन अब तुझे
तू रूह है ना
मेरी रूह है, ना दूर जा
कैसे मैं भूलूँ? भूलूँ?
तू आती है ख़्वाबों में
रोज़ ही मैं छू लूँ, छू लूँ
डूबूँ मैं यादों में जब तेरी
तू रूह है ना
मेरी रूह है, ना दूर जा
तू दूर जाए
तो दिल रुलाए, सताए
हाँ मेरी आदत है तू
तेरे बिना ये रातें जगाए, जलाये
मेरी ज़रूरत है तू
है रूह मेरी तू..
तरसे तरसे दिल तरसे
लम्हें लगते हैं अरसे
सावन तुझ बिन ना बरसे
गुज़रे ना मेरे दर से
तरसे तरसे दिल तरसे
लम्हें लगते हैं अरसे
सावन तुझ बिन ना बरसे
गुज़रे ना मेरे दर से
गुज़रे ना मेरे दर से
हाँ... हाँ... हाँ... हाँ...
बेबस़ी में बस तुझी में
था मैं खोया हुआ
तू जो छूटा ख़्वाब टूटा
हो गया सब धुआँ
पास आके यूँ जला के
क्यों गया तू बता?
मान जा, हमें ना सज़ा दे
लौट आ तू ज़रा
है तेरी सीने में जो
जला दे, मिटा दे
हाँ मेरी राहत है तू
तेरे बिना ये रातें जगाए, जलाए
मेरी ज़रूरत है तू
है रूह मेरी तू
तरसे तरसे दिल तरसे
लम्हें लगते हैं अरसे
सावन तुझ बिन ना बरसे
गुज़रे ना मेरे दर से
तरसे तरसे दिल तरसे
लम्हें लगते हैं अरसे
सावन तुझ बिन ना बरसे
गुज़रे ना मेरे दर से
गुज़रे ना मेरे दर से
हाँ... हाँ... हाँ... हाँ...!
गीतकार: अलोक रंजन श्रीवास्तव
About ROOH (रूह) Song
यह गाना "रूह" एक दिल को छू लेने वाली प्रेम और विरह की भावनाओं को बयां करता है, जिसे Akashdeep Sengupta ने गाया और compose किया है, lyrics Alok Ranjan Srivastava द्वारा लिखे गए हैं, और इसे T-Series ने release किया है। गाने की शुरुआत ही यादों और तड़प से होती है, जहाँ गायक कहता है कि अब रातें उसे प्यार की बातें याद दिलाती हैं, और हर सांस उस खास इंसान के बिना अधूरी लगती है, वह उस व्यक्ति को अपनी "रूह" यानी आत्मा बताता है और दूर जाने से मना करता है।
गाने के बोल में गहरी उदासी और तलाश झलकती है, गायक सवाल करता है कि वह कैसे भूल पाए जब वह इंसान उसके ख्वाबों में आता है, वह रोज उसे छूना चाहता है और उसकी यादों में डूब जाता है, दूर जाने पर दिल रोता है और बेचैन करता है, वह कहता है कि उसकी आदत और जरूरत बन गई है वह इंसान, बिना उसके रातें जलती हैं और सताती हैं। गाने के अंतरा (antra) में प्रतीकात्मक भाषा है, जैसे "सावन तुझ बिन ना बरसे" यानी तुम्हारे बिना बारिश भी नहीं आती, और दिल तरसता रहता है, यह बताता है कि प्रेमी का दरवाजा उसके बिना नहीं खुलता।
आखिरी हिस्से में निराशा और बेबसी की भावना है, गायक कहता है कि वह बेबसी में उसी में खोया था, और उसके जाने से सब कुछ धुंधला हो गया, वह पूछता है कि इतना पास आकर उसे जलाकर क्यों चला गया, और वापस लौट आने की गुहार लगाता है, क्योंकि वही उसकी राहत और जरूरत है, यह गाना प्यार की गहराई, जुदाई का दर्द और आत्मीय जुड़ाव को साधारण हिंदी में बखूबी दर्शाता है, जिससे श्रोता आसानी से जुड़ सकते हैं।