दो दीवाने शहर में लिरिक्स (Do Deewane Sheher Mein - Reprised Lyrics in Hindi) – Runa Laila, Bhupinder Singh | Do Deewane Seher Mein

दो दीवाने शहर में के बोल | Runa Laila और Bhupinder Singh की अमर आवाज़। Gulzar के लिरिक्स में शहर की तन्हाई और प्यार की तलाश की दास्तान। Siddhant-Mrunal की फिल्म का ये रिप्राइज़ वर्ज़न सुनें।

Do Deewane Sheher Mein - Reprised Song Poster from Do Deewane Seher Mein

Do Deewane Sheher Mein - Reprised Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (दो दीवाने शहर में)

दीवाना 
एक दीवाना शहर में 
एक दीवाना नहीं, 
एक दीवानी भी 

दो दीवाने शहर में, 
रात में या दोपहर में 
आब-ओ-दाना 
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं, 
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं 
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं, 
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं 
दो दीवाने शहर में, 
रात में या दोपहर में 
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं, 
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं 
दो दीवाने... 

इन भूल-भुलैया, गलियों में 
अपना भी कोई इक घर होगा 
अंबर पे खुलेगी खिड़की या, 
खिड़की पे खुला अंबर होगा 

इन भूल-भुलैया, गलियों में 
अपना भी कोई इक घर होगा 
अंबर पे खुलेगी खिड़की या, 
खिड़की पे खुला अंबर होगा 

असमानी रंग की आँखों में 
असमानी या आसमानी? 
असमानी रंग की आँखों में 
बसने का बहाना ढूँढ़ते हैं, ढूँढ़ते हैं 

आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं, 
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं 
दो दीवाने शहर में, 
रात में या दोपहर में 
आब-ओ-दाना ढूँढ़ते हैं, 
एक आशियाना ढूँढ़ते हैं 

दो दीवाने, दो दीवाने 
दो दीवाने, हाँ, दो दीवाने 
दो दीवाने...!

गीतकार: गुलज़ार


About Do Deewane Sheher Mein - Reprised (दो दीवाने शहर में) Song

यह गाना "दो दीवाने शहर में" है, जो एक reprise version है, इसमें दो प्यार करने वाले, यानी एक दीवाना और एक दीवानी, एक बड़े शहर में अपनी जगह तलाश करते हैं, वे रात हो या दिन, "आब-ओ-दाना" यानी रोटी और पानी, और एक "आशियाना" यानी घर ढूंढ रहे हैं, यह गाना Gulzar के लिरिक्स की वजह से गहरा अर्थ रखता है, जो शहर की भूलभुलैया और अकेलेपन को दिखाता है, संगीत Jaidev और Jackie Vanjari ने दिया है, और इसे Runa Laila और Bhupinder Singh ने गाया है, यह गाना movie "Do Deewane Seher Mein" से है, जिसमें Siddhant Chaturvedi और Mrunal Thakur मुख्य कलाकार हैं, और इसे Saregama Music ने रिलीज़ किया है।

गाने के बोल एक सपने और तलाश की कहानी कहते हैं, लिरिक्स कहते हैं कि इन भूलभुलैया गलियों में भी उनका अपना एक घर होगा, जहाँ आसमान पर खिड़की खुलेगी, या खिड़की पर आसमान खुला होगा, फिर गाना "असमानी रंग की आँखों" की बात करता है, जहाँ ये दीवाने बसने का बहाना ढूंढते हैं, यहाँ "असमानी" शब्द का मतलब आसमानी रंग या अनोखापन दोनों हो सकता है, जो Gulzar की लेखन शैली की खासियत है।

अंत में, गाना दोहराता है कि ये "दो दीवाने" लगातार अपना आशियाना और जीवन की बुनियादी ज़रूरतें ढूंढ रहे हैं, यह गाना प्यार, अकेलेपन, और शहरी जीवन की खोज को बहुत खूबसूरती से बयां करता है, और संगीत व आवाज़ें इसे यादगार बनाती हैं।


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