इश्क़ की उमर लिरिक्स (Ishq Ki Umar Lyrics in Hindi) – Papon | Vadh 2

इश्क़ की उमर के बोल | Vadh 2 का दिल छू लेने वाला रोमांटिक गीत। Papon की मधुर आवाज़, Rochak Kohli का संगीत। प्यार के आने का एहसास और उस पल को थाम लेने की चाहत।

Ishq Ki Umar Song Poster from Vadh 2

Ishq Ki Umar Lyrics in Hindi – Full Song Lyrics (इश्क़ की उमर)

लो आयी इश्क़ की उमर
डरने लगी है ये नज़र
ना जाए दिल फिसल कहीं
गलती से तुमको देख कर

चेहरे पे ये जो शर्म है
है मेरे इश्क़ का सब्र
ना जाए दिल फिसल कहीं
गलती से तुमको देख कर

ये मेरे हक़ की शाम है
इस पे तेरा ही नाम है
पहुँचे जहाँ है आज वो
खूबसूरत मुकाम है

यही पे वक़्त को मैं रोक लूँ
कह दो तुम जो अगर

लो आयी इश्क़ की उमर..

तेरी हवा में बहने लगा हूँ
आँखों से लफ़्ज़ों को कहने लगा हूँ
अब कुछ दिनों से घर छोड़ के मैं
तेरे ख़यालों में रहने लगा हूँ

बाहों की अपनी हो चार दीवारी
बस इतनी सी ही थी ख़्वाहिश हमारी
दिल बे-सुकून थे, बेचैन थे हम
आके यहाँ हो ख़त्म बेकरारी

ये मेरे हक़ की शाम है
इस पे तेरा ही नाम है
पहुँचे जहाँ है आज हम
खूबसूरत मुकाम है
यही पे वक़्त को मैं रोक लूँ
कह दो तुम जो अगर

लो आयी इश्क़ की उमर
डरने लगी है ये नज़र
ना जाए दिल फिसल कहीं
गलती से तुमको देख कर
लो आयी इश्क़ की उमर

गीतकार: कुमार


About Ishq Ki Umar (इश्क़ की उमर) Song

यह गाना "Ishq Ki Umar" है, जो movie "Vadh 2" से है, इसमें Sanjay Mishra और Neena Gupta ने काम किया है, यह गाना Luv Films के तहत release हुआ है, music composer Rochak Kohli ने इसे compose किया है, lyrics Kumaar ने लिखे हैं और singer Papon ने इसे गाया है। 

गाने के lyrics बहुत खूबसूरत हैं, यह प्यार की उम्र (Ishq Ki Umar) के बारे में है, शुरुआत में गायक कहता है कि "लो आयी इश्क़ की उमर, डरने लगी है ये नज़र", मतलब प्यार का वक्त आ गया है और नज़रें डरने लगी हैं, वो डरता है कि कहीं दिल फिसल न जाए, सिर्फ तुम्हें गलती से देखकर, फिर वो बताता है कि चेहरे पर जो शर्म है, वो उसके प्यार का सब्र है, वो दोबारा कहता है कि दिल फिसलने का डर है। 

आगे के हिस्से में, गायक कहता है कि ये शाम उसके हक की है और उस पर तुम्हारा ही नाम है, जहाँ वो आज पहुँचा है, वो एक खूबसूरत मुकाम है, वो चाहता है कि वक़्त को यहीं रोक ले, अगर तुम कहो, फिर वो बताता है कि वो तुम्हारी हवा में बहने लगा है, आँखों से लफ़्ज़ कहने लगा है, कुछ दिनों से घर छोड़कर तुम्हारे ख़यालों में रहने लगा है, उसकी बाहें ही उसकी चारदीवारी हैं, बस इतनी सी ख़्वाहिश थी, दिल बेसुकून और बेचैन था, जो यहाँ आकर ख़त्म हुई, फिर से वो कहता है कि ये शाम उसके हक की है और यह खूबसूरत मुकाम है, वो वक़्त को रोकना चाहता है, अंत में गाना फिर से "इश्क़ की उमर" के साथ खत्म होता है, जो पूरे गाने का मुख्य भाव है - प्यार के आने का एहसास, डर, और उस खूबसूरत लम्हे को थाम लेने की चाहत।


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